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Monday, February 07, 2011
Gunaah
Jaane kya gunaah ho gaya humse,
Ki woh yun khafa ho gaye,
Hum to haal-e-dil bayaan kar rahe the,
Par shayad unke jazbaat samajhna bhool gaye |
Saturday, May 15, 2010
हमारी ज़हानत
क्या समझोगे आप हमारी ज़हानत को,
आपसे नाता हम तोड्द देंगे |
ना बर्दाश्त करेंगे ऐसी ज़िल्लत,
एक दिन इस दुनिया को ही छोडद देंगे |
आपसे नाता हम तोड्द देंगे |
ना बर्दाश्त करेंगे ऐसी ज़िल्लत,
एक दिन इस दुनिया को ही छोडद देंगे |
Wednesday, March 31, 2010
बारिश में भींग जाने दो |
आज मुझे बारिश में भींग जाने दो,
फिर उस गीली मिट्टी की खुश्बू को महसूस करने दो,
कब तक रोक के रखोगे,
कभी तो इस दर्द में थोड़ी उमंग भरने दो!
फिर उस गीली मिट्टी की खुश्बू को महसूस करने दो,
कब तक रोक के रखोगे,
कभी तो इस दर्द में थोड़ी उमंग भरने दो!
Tuesday, November 17, 2009
तन्हाई
दोसतों के बीच भी क्यूँ खोया खोया सा रहता हूँ,
अपनों के बीच भी क्यूँ तन्हाई महसूस करता हूँ,
यह कैसा असर है आपकी जुदाई का,
कि दुनिया जीतने पर भी हार महसूस करता हूँ |
इस शेर में हमारी मदद करने के लिए Shreenivasan, Nipanjana, Sutapa और Shailesh को हमारी तरफ़ से धन्यवाद |
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अपनों के बीच भी क्यूँ तन्हाई महसूस करता हूँ,
यह कैसा असर है आपकी जुदाई का,
कि दुनिया जीतने पर भी हार महसूस करता हूँ |
इस शेर में हमारी मदद करने के लिए Shreenivasan, Nipanjana, Sutapa और Shailesh को हमारी तरफ़ से धन्यवाद |
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Thursday, October 08, 2009
मेरी ज़िन्दगी
जो पाने निकला था वोह मिला नहीं,
जो मिला उसे रख सका नहीं,
यह कैसी अजीब कहानी है मेरी ज़िन्दगी की,
कि जिससे सब पाया उसे हासिल कर सका नहीं |
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जो मिला उसे रख सका नहीं,
यह कैसी अजीब कहानी है मेरी ज़िन्दगी की,
कि जिससे सब पाया उसे हासिल कर सका नहीं |
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Tuesday, August 04, 2009
प्यार में दर्द
प्यार खुशी देती है, दर्द भी, प्यार हँसी देती है, आंसू भी,
प्यार मिलने की उम्मीद देती है, बिछड़ने का गम भी
आप नसीबवाले होंगे जो आपको आपके प्यार ने खुशी दी,
पर हमें तो इस प्यार ने देवदास बना दिया और शायर भी |
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प्यार मिलने की उम्मीद देती है, बिछड़ने का गम भी
आप नसीबवाले होंगे जो आपको आपके प्यार ने खुशी दी,
पर हमें तो इस प्यार ने देवदास बना दिया और शायर भी |
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Tuesday, June 23, 2009
याद
आज मौसम बड़ा सुहाना है, और हमारा mood बड़ा शायराना है ! इसलिए अर्ज़ किया है....
हर वक्त मैं तुझे याद करता हूँ,
हर लम्हे में तुझे जिया करता हूँ,
अब तो यकीन कर लो मेरे वफाओं को,
नहीं तो मांग लो मेरे मौत की दुआओं को |
और इस शायरी के एक दीवाने, Shreenivasan, का सुहाना जवाब...
क्यूँ फालतू में मुझे याद करता है,
खामखा हिचकियाँ क्यूँ दिलाता है,
मरना है तो ऐसे ही मर जाओ,
दुआ मुझसे करवाके, मुझे पापी क्यूँ बनाता है |
हर वक्त मैं तुझे याद करता हूँ,
हर लम्हे में तुझे जिया करता हूँ,
अब तो यकीन कर लो मेरे वफाओं को,
नहीं तो मांग लो मेरे मौत की दुआओं को |
और इस शायरी के एक दीवाने, Shreenivasan, का सुहाना जवाब...
क्यूँ फालतू में मुझे याद करता है,
खामखा हिचकियाँ क्यूँ दिलाता है,
मरना है तो ऐसे ही मर जाओ,
दुआ मुझसे करवाके, मुझे पापी क्यूँ बनाता है |
Tuesday, June 02, 2009
दिल का दर्द
Found this randomly somewhere:
दिल के दर्द को जुबाँ पर लाते नहीं,
हम अपनी आंखों से आंसू बहाते नहीं,
ज़ख्म चाहे कितने ही गहरे क्यूँ ना हो,
हम DETTOL के सिवा कुछ लगाते नहीं.
दिल के दर्द को जुबाँ पर लाते नहीं,
हम अपनी आंखों से आंसू बहाते नहीं,
ज़ख्म चाहे कितने ही गहरे क्यूँ ना हो,
हम DETTOL के सिवा कुछ लगाते नहीं.
Wednesday, May 27, 2009
तुम्हारे जनाज़े पर रोये
कोई दिखा के रोये,
कोई छुपाके रोये,
पर मौत का असली मज़ा तो तब आये
जब कातिल खुद तुम्हारे जनाज़े पर रोये |
कोई छुपाके रोये,
पर मौत का असली मज़ा तो तब आये
जब कातिल खुद तुम्हारे जनाज़े पर रोये |
Tuesday, August 28, 2007
क्या तुम्हें याद है
क्या तुम्हें याद है,
बारिश की वोह रात ,
जब हम चल पड़े थे
हाथों में लेकर हाथ ?
वोह बारिश में टपकती
बूंदों की आवाज़,
वोह आकाश में गरजते
बादलों का साज़!
हम दोनों कुछ खोये से
कुछ घबराए से थे,
और राह ना देख पाने के कारण
असमंजस में थे !
क्या करे क्या ना करें
यह सोचने लगे,
और धीरे धीरे एक दूसरे
के करीब आने लगे!
फ़िर कहीं से एक आवाज़ आई
जिसमें तेरा नाम था,
पलट के देखा तो
खड़ा तेरा बाप था!
अब आगे लिखते हुए
मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं,
अस्पताल में बिताये हुए
वोह पल याद आ जाते हैं !!
बारिश की वोह रात ,
जब हम चल पड़े थे
हाथों में लेकर हाथ ?
वोह बारिश में टपकती
बूंदों की आवाज़,
वोह आकाश में गरजते
बादलों का साज़!
हम दोनों कुछ खोये से
कुछ घबराए से थे,
और राह ना देख पाने के कारण
असमंजस में थे !
क्या करे क्या ना करें
यह सोचने लगे,
और धीरे धीरे एक दूसरे
के करीब आने लगे!
फ़िर कहीं से एक आवाज़ आई
जिसमें तेरा नाम था,
पलट के देखा तो
खड़ा तेरा बाप था!
अब आगे लिखते हुए
मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं,
अस्पताल में बिताये हुए
वोह पल याद आ जाते हैं !!
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- Abhishek Saha
- Lucknow, Uttar Pradesh, India
- A NRB (Non Resident Bengali) or rather a 'Probashi Bangali'; born in Kolkata, brought up in Jamshedpur and now trying to make his mark at IIM Lucknow.
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